फिर बात मेरी .. Yet Again

ये किस जवाब के बदले..
फिर कुछ सवाल थे तुम्हारे !

हँस कर ही खामोश हो चले हम..
बहल ही गया ना फिर,
बात अपना अनेकों इन्तेजार करके !

फिर वही कुछ पुराने वादों में घिरे,
किसी बनावटी किस्सों में उलझे,
बात आ निकली घुमावदार रस्तों से !

असमंजस मेरा, या फिर झुके मन मेरा,
अपनी ही हार सही हुई हर बार की तरह,
इस कदर सहम जाता, कब समझा पाऊ बात मेरी,
या कोई अभिमान ना ले जाये तुझे दूर कहीं !

कोशिश तो की हाथ छुराने की पर..
परी हुई है किन यादों की गाँठ कई !

#Sujit ..

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