शीत की रातें - Autumn Back

सीधी सपाट सड़को के किनारे,
कुछ खंडर किले सा झलका,
नीली रौशनी से भींगा छत उसका,
कुछ बरखा ओस ले आयी,
हवा सनसन ठंडक भर लायी !

हल्की भींगी ओस नहायी रातें,
और हवा भी कहती ऐसी बातें,
शिशिर सिरहाने कदम जो रखा,
चाँद गगन में थोरा सा बहका,
हाथों में हाथों को मिलाये,
सखे संग से बात बढ़ाये !

सर्द हवाओं ने मेरे संग यूँ खेला,
मौन मौसम ने अब रंग खोला !

शांत शरद शीत की रातें..
मन शिशिर संग अब कैसी बातें ??

Sujit

Labels: , , , , , , , , ,