
हर मोड मे यूँ मिल जाते हो ,
कैसे माने चले गए थे कहीं .
ख़ामोशी का सबब ले बैठते जब हम..
तो चुपके से गुन गुनाते हो कहीं ..
मायूस से लगते जब कभी हम,
थोड़ा गुदगुदाते हो कहीं ..
कैसे सम्हले हम ठोकरों से ,
खुद ही राहों मे खड़े मिल जाते हो कभी ..
शायद मान बैठे गैर सभी ,
अपने का अहसास दिलाते हो कभी ..
अब तक कैसे समझे चले गए !
साये से दिख जाते हो कभी !
खामोश होकर खुद रहते हो कहीं..
और यारों को बहुत रुलाते हो कभी !
जब भी पूछ बैठा मैं हाल तेरा,
खुद यारों से छुपाते हो कभी !
हम बन जाते जब मगरूर,
क्या पास कभी बुलाते हो कभी !
सोचता हूँ तेरे बारे में हर पल,
क्या सपनों में सजाते हो कभी !
ना रुप ना रंग देखा तेरा कहीं ,
बस दोस्ती का संग दिखाते हो कभी,
परेशां से हुए जो हुए कहीं इन राहों में,
खुदा सा बन के सजदे में झुकाते हो कभी !
Dedicated to all my friends ....Wish you all the friends Happy Friendship Day !
~ SUJIT
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