
कभी हँसे जो मेरी हसरतों पर ..
हमने उन्हें भी सलाम किया ...
सब लोग कहते है मुझे खुदा सा , पर मेरी ये खता नही मेरे रब ..
तेरी ओर ये नजर रखी, और बस मैंने तो सपनो को अंजाम दिया ! !
रचना : सुजीत कुमार लक्की
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