आज हम यूँ भीगे जी भर के - A Day In Rain

आज हम भीगे यूँ जी भर के ...
ना डर था कोई रोक लेगा आ के हमे !

ना डर था माँ डाटेंगी यूँ भीगे कपड़ो को देख कर !
ना कोई लपक के सहलायेगा भीगे बालों को ,
ना मिल जायेगी, कोई गर्म प्याली चाय की ..

बस नजाने क्यूँ दो चार बुँदे ,
आँखों से फिसल गयी इस बरसात में !
बस आज हम भीगे यूँ जी भर के ऐसे ..

रचना : सुजीत कुमार लक्की


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