
वक्त के किसी दोराहे पर खरे !
अच्छाई और बुराई के अंतरद्वंद में घिरे !
हरिवंश राय बच्चन जी की कुछ पंकियो को ,
आप अपने जिंदगी के बहुत करीब पाओगे !
शायद कई उलझे सवालो का जवाब इस कविता में है !!
मैंने शांति नहीं जानी है !- हरिवंश राय बच्चन
मैंने शांति नहीं जानी है !
त्रुटि कुछ है मेरे अन्दर भी ,
त्रुटि कुछ है मेरे बाहर भी ,
दोनों को त्रुटि हीन बनाने की मैंने मन में ठानी है !
मैंने शांति नहीं मानी है !
आयु बिता दी यत्नों में लग ,
उसी जगह मैं , उसी जगह जग ,
कभी - कभी सोचा करता अब , क्या मैंने की नादानी है !
मैंने शांति नहीं जानी है !
पर निराश होऊं किस कारण ,
क्या पर्याप्त नहीं आशवासन ?
दुनिया से मानी , अपने से मैंने हार नहीं मानी है !
मैंने शांति नहीं जानी है
प्रेषित : सुजीत कुमार लक्की
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