गर्व हमे की हमने तो भारत भूमि पर जन्म है पाया ,
बचपन से ही इस माटी में लोट पोट इठलाया !
जरा देखो कृषक की बातो को, इनके सीनों पर हल को चलाया,
और ने माँ ने फिर भी दोनों हाथो से, हमको अन्न खिलाया !
गौरवमयी इतिहास...
इस धरा की शान की खातिर कितनो ने खून बहाया ,
क्या भगत क्या बोस कहे, हँस हँस कर प्राण गवांया,
रक्त सनित इस भूमि पर हँस के फूल खिलाया !
आज का परिदृश्य ...
आज देखो इन नजरो में कैसा आतंक है छाया,
ऐसी भी क्या बात हुई भाई ने भाई का खून बहाया !
है एक तुच्छ नमन मातृभूमि चरणों में ...
गर्व हमे है हमने तो भारत भूमि पर जन्म है पाया..
बस ये स्वदेश है अपना, मन ने आवाज लगाया !
स्वाधीनता दिवस की हार्दिक शुभकामनाये ! ! - सुजीत
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