
यूँ बैठे थे की हवाओ ने रुख बदला और कुछ फुहारों ने मन को हर्षित कर दिया और कुछ मन मे आये भाव...
देखो बह रही ये कैसी बहार,
बरसी है तन पे ये भीगी फुहार !
यूँ निहारे वो मन को और गाये ये राग,
बरसों यूँ मेघा कर दो शीतल तुम आज !
छोरे तपिश को, नाचे हम आज,
आई रे आई ये रिमझिम फुहार !
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