
एक खास , कोई पास , एक अजनबी अहसास ,
कुछ दबी , कुछ छुपी ये है जज्बात !
मन के तरंगों में उठती कोई बात ,
चुपके से छू जाती एक धीमी आवाज !
कुछ कल्पित भावो का कैसा ये साथ ?
कदम ना रोको जिन्दगी की ...
हरपल है एक नयी शुरूआत !
एक खास , कोई पास , एक अजनबी अहसास ..
रचना : सुजीत कुमार लक्की
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