
महगाई पर माथे की शिकन !
हिंसा से विचलित मन,
गणतंत्र पर जन गण मन !
हर बुराई के खिलाफ एक रण ,
मैंने भी शांति नहीं मानी है ...
गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ जय हिंद !
रचना : सुजीत कुमार लक्की
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