एक नये वर्ष को आना है ,
बस खुशियों में खो जाना है !
बीते हुए वर्ष से ...
कुछ यादें देकर चली गयी ,
कुछ वादों से वो मुकर गयी ,
किस रस्ते लेकर चली गयी,
अब उसको क्या समझाना है,
एक नये वर्ष को आना है !
कब गुजर गया ये वर्ष...
कब क्या सोचा समझा पता नहीं ,
आँखें भी तर थी, पता नही ,
कोई चला गया कुछ खबर नहीं ,
हम भी चलते रहे, पर डगर नहीं !
अब तो बस अपनी ही बारी है ,
एक नये की वर्ष की तैयारी है !
रचना : सुजीत कुमार लक्की (आप सभी को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ )
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