एक क्रिकेट मैच की वेदना

छुपते नही आंसू आब इन चेहरों में ,
इसे निकलने का एक जरिया दे दे !

बहुत मायूस इस भीड़ में हम,

बस रोने का एक कंधा दे दे !

बहुत लड़ चूका अपनी कीस्मत से ....

मेरे खुदा तू मुझे कब तक आज्म्येगा .....


एक रोज की साम ही थी ये क्रिकेट मैच लेकिन ,
कुछ उमीदो को यूँ ढहते देख मन वेदना से भर गया,
आज पहली बार sachin के आँखों में ३ रन की अहमियत देखी,
लग रही थी आंसू के सैलाब को भीड़ ने रोक रखा हो
बस हमारा मन भी भावनाओ से आहात हुआ जा रहा
काश हम जीत जाते , एक शतकवीर ३ रन के लए तरस गया ..

रचना : सुजीत कुमार लक्की

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