
भागती ऊहापोह जिन्दगी में
क्या खोने पाने की चाहत है,
बस उबते थकते मन को बहलाते
चले जा रहे एक अनजान सफ़र पर !
क्या पाउगा या क्या खो दूगा,
गुमनाम चाहत है एक हसरत है,
सपनो की बादल की एक बूंद ही सही
बस चले जा रहे एक अंजन सफ़र परLabels: A unknown destiny, hindi poem blog, hindi poetry blog, sujit hindi poem, sujit poetry, unknown travel, एक अनजान सफ़र