एक अनजान सफ़र


भागती ऊहापोह जिन्दगी में
क्या खोने पाने की चाहत है,

बस उबते थकते मन को बहलाते

चले जा रहे एक अनजान सफ़र पर !


क्या पाउगा या क्या खो दूगा,
गुमनाम चाहत है एक हसरत है,
सपनो की बादल की एक बूंद ही सही
बस चले जा रहे एक अंजन सफ़र पर

रचना : सुजीत कुमार लक्की


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